फेमा उल्लंघन मामले में जेनपैक्ट इंडिया को बड़ी राहत, आरबीआई ने दिया क्लीन चिट

RBI

फेमा उल्लंघन के एक मामले में जेनपैक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी राहत मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के तहत कंपनी के खिलाफ दर्ज मामले में कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी कर दिया है। यह आदेश 17 अक्टूबर को फेमा की धारा 15 के अंतर्गत पारित किया गया, जिसके बाद जेनपैक्ट इंडिया के खिलाफ चल रही सभी न्यायिक और प्रशासनिक कार्रवाइयों का समापन हो गया है।

आरबीआई के अनुसार, यह कंपाउंडिंग ऑर्डर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से ‘नो ऑब्जेक्शन’ मिलने के बाद जारी किया गया। इससे पहले ईडी को प्राप्त विश्वसनीय जानकारी के आधार पर जेनपैक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ फेमा के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की गई थी।

जांच पूरी होने के बाद ईडी ने 16 अक्टूबर 2018 को फेमा की धारा 16 के तहत निर्णायक प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज की थी। इस शिकायत में कंपनी द्वारा किए गए दो प्रमुख फेमा उल्लंघनों का उल्लेख किया गया था। पहला उल्लंघन विदेशी निवेश से संबंधित था, जिसमें फेमा 20/2000-आरबी के शेड्यूल-1 के पैरा 9(1)(ए) के तहत विदेशी इनवर्ड रेमिटेंस की रिपोर्टिंग में देरी पाई गई। इस देरी की राशि 13.49 करोड़ रुपये बताई गई थी।

दूसरा उल्लंघन शेयर जारी करने के बाद फॉर्म एफसीजीपीआर (FC-GPR) समय पर दाखिल न करने से जुड़ा था। यह मामला फेमा 20/2000-आरबी के शेड्यूल-1 के पैरा 9(1)(बी) के अंतर्गत आता है, जिसमें देरी की राशि 13.01 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

इन उल्लंघनों के आधार पर 17 अक्टूबर 2018 को निर्णायक प्राधिकारी ने कंपनी, उसके निदेशकों और संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बाद में जेनपैक्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने फेमा की धारा 15 के तहत इन उल्लंघनों को कंपाउंड कराने के लिए आरबीआई के समक्ष आवेदन किया। आरबीआई के अनुरोध पर ईडी ने इस प्रक्रिया के लिए अपनी सहमति यानी ‘नो ऑब्जेक्शन’ प्रदान किया।

इसके बाद आरबीआई ने 17 अक्टूबर 2025 को कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी करते हुए जेनपैक्ट इंडिया पर 4,72,490 रुपये का एकमुश्त जुर्माना निर्धारित किया। इस राशि के भुगतान के साथ ही कंपनी, उसके निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ फेमा के तहत चल रही सभी कार्रवाई पूरी तरह समाप्त हो गईं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed