भारत में हाइड्रोजन मोबिलिटी को बढ़ावा: टोयोटा मिराई FCEV के रियल-वर्ल्ड ट्रायल की शुरुआत

भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन–आधारित मोबिलिटी को तेज़ी देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए टोयोटा की मिराई फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEV) का रियल-वर्ल्ड ट्रायल शुरू किया है। यह पायलट प्रोजेक्ट गुरुवार को केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी द्वारा लॉन्च किया गया। उन्होंने इसे स्वच्छ परिवहन समाधान को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
इस परियोजना के तहत टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने मिराई FCEV को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) को सौंपा। यह वाहन दो वर्षों तक विभिन्न भारतीय भू-भागों, मौसम परिस्थितियों और ट्रैफिक वातावरण में परीक्षण से गुज़रेगा। NISE इन ट्रायल्स के आधार पर भविष्य की नीतियों, उद्योग में तैनाती और हाइड्रोजन मोबिलिटी के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण निष्कर्ष तैयार करेगा।
जोशी ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों का एक प्रमुख घटक बनता जा रहा है और भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने बताया कि मिराई का ट्रायल सरकार, शोध संस्थानों और उद्योग के बीच बढ़ते सहयोग का प्रतीक है। मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि हाइड्रोजन वाहन शून्य टेलपाइप उत्सर्जन करते हैं और केवल पानी छोड़ते हैं।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा कि यह पायलट, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत नीतिगत घोषणाओं से ज़मीनी परीक्षणों की ओर बढ़ने का संकेत है। उन्होंने कहा कि ऐसे तकनीकी ट्रायल हाइड्रोजन-आधारित परिवहन को व्यावसायिक रूप से अपनाने और शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने कहा कि यह साझेदारी भारत के हाइड्रोजन मिशन और नेट-ज़ीरो लक्ष्यों को समर्थन देने की दिशा में एक मजबूत कदम है। लॉन्च कार्यक्रम में मंत्रालय और NISE के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
लॉन्च के बाद प्रह्लाद जोशी ने मिराई को संसद तक चलाकर ले जाया और कहा कि ग्रीन-प्रमाणित पार्लियामेंट भवन उभरती स्वच्छ मोबिलिटी तकनीकों को प्रदर्शित करने के लिए एक उपयुक्त स्थान है।
टोयोटा मिराई दूसरी पीढ़ी की हाइड्रोजन फ्यूल-सेल कार है, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से ऑनबोर्ड बिजली उत्पन्न करती है और केवल जलवाष्प का उत्सर्जन करती है। इसकी अनुमानित ड्राइविंग रेंज लगभग 650 किलोमीटर है और इसे 5 मिनट से कम समय में फिर से फ्यूल किया जा सकता है।
