PRAGATI @50 भारत में परियोजना क्रियान्वयन की रफ्तार बदलने वाला शासन मॉडल बना

भारत में दशकों तक बड़ी सरकारी परियोजनाएं देरी, बढ़ती लागत और अफसरशाही की जटिलताओं की शिकार बनी रहीं। रेलवे लाइनें हों, हाईवे, बिजली परियोजनाएं या हवाई अड्डे, ज्यादातर काम तय समय से सालों पीछे खिसक जाते थे। मंत्रालयों के बीच तालमेल की कमी, केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय का अभाव और राज्यों के भीतर विभागीय खींचतान इसकी बड़ी वजह रही। इसी समस्या के स्थायी समाधान के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में प्रगति यानी प्रो एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन प्लेटफॉर्म की परिकल्पना की।
25 मार्च 2015 को शुरू हुए प्रगति का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना था। यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और विभिन्न विभागों को एक साथ जोड़कर बड़ी परियोजनाओं, सरकारी योजनाओं और नागरिकों की शिकायतों की निगरानी करता है। इसमें पीएम गति शक्ति, परिवेश और पीएम रेफरेंस पोर्टल जैसे टूल भी जुड़े हुए हैं, जिससे किसी भी परियोजना की स्थिति को रियल टाइम में देखा और अटकी हुई फाइलों को तुरंत आगे बढ़ाया जा सकता है।
इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री खुद प्रगति की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और सीधे राज्यों के मुख्य सचिवों तथा केंद्र के सचिवों से बात कर समस्याओं का समाधान निकालते हैं। जो मुद्दे मंत्रालय स्तर पर नहीं सुलझते, उन्हें यहां उठाया जाता है और फिर उनके समाधान पर लगातार निगरानी रखी जाती है ताकि फैसले सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें बल्कि जमीन पर दिखें।
आंकड़े बताते हैं कि इस सिस्टम ने काम करने के तरीके को बदला है। प्रगति और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप पोर्टल के अनुसार अब तक 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 3300 से ज्यादा परियोजनाओं की निगरानी की जा चुकी है। 36 क्षेत्रों से जुड़ी 7735 समस्याएं सामने आईं, जिनमें से 7156 का समाधान कर लिया गया है यानी 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में अड़चनें दूर हो चुकी हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा सीधे समीक्षा की गई परियोजनाओं में सड़क, रेलवे, बिजली और पेट्रोलियम जैसे वे क्षेत्र शामिल हैं, जहां अक्सर जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और राइट ऑफ वे जैसी दिक्कतें आती थीं। इन परियोजनाओं से जुड़े 3187 मुद्दों में से 2958 को सुलझाया जा चुका है।
प्रगति का असर उन परियोजनाओं में साफ दिखाई देता है जो दशकों से अटकी हुई थीं। जम्मू उधमपुर श्रीनगर बारामुला रेल परियोजना जिसे 1994 में मंजूरी मिली थी, प्रगति की निगरानी के बाद आगे बढ़ी और जून 2025 में पूरी हुई। इसी तरह 2007 में स्वीकृत नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट वर्षों की देरी के बाद दिसंबर 2025 में शुरू हो सका। असम का बोगीबील रेल सह सड़क पुल भी प्रगति के जरिए अड़चनें दूर होने के बाद पूरा हुआ।
प्रगति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सईद बिजनेस स्कूल की दिसंबर 2024 की रिपोर्ट में इसे एक परिवर्तनकारी डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म बताया गया, जिसने वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाई और विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद की।
अब तक प्रगति पीएमजी सिस्टम के तहत 427 परियोजनाएं ली गई हैं जिनमें से 158 पूरी हो चुकी हैं और 266 पर काम चल रहा है। 50 उच्चस्तरीय बैठकों के साथ प्रगति अब सिर्फ एक पहल नहीं बल्कि शासन का एक मजबूत संस्थान बन चुका है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत की विकास योजनाएं सिर्फ घोषणाओं तक सीमित न रहें बल्कि समय पर धरातल पर उतरें
