चुनाव आयोग की टीम का दो दिवसीय बिहार दौरा, राजनीतिक दलों से हुई अहम बैठक

बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम तेज कर दिए हैं कि इस बार का चुनाव पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो। इसी सिलसिले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की टीम दो दिनों के बिहार दौरे पर है। शनिवार को पटना में आयोग ने राज्य के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की। उनके साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी मौजूद थे। बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल और आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक का हिस्सा बने। वहीं दूसरी ओर, राज्य के लगभग सभी बड़े राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बैठक की शुरुआत यह कहते हुए की कि “राजनीतिक दल लोकतंत्र की आधारशिला हैं और उनकी सक्रिय भागीदारी चुनावी प्रक्रिया के हर चरण में आवश्यक है।” उन्होंने सभी दलों से अपील की कि चुनाव को लोकतंत्र का उत्सव मानकर सौहार्दपूर्ण माहौल में आयोजित किया जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाताओं का सम्मान सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आयोग ने राजनीतिक दलों को यह भी याद दिलाया कि हर बूथ पर पोलिंग एजेंट की नियुक्ति अनिवार्य है। इससे मतदान की प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत होंगे।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं
बैठक में शामिल राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में उठाए गए कदमों की सराहना की। खासकर मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए चलाए गए SIR (Special Intensive Revision) अभियान को सभी दलों ने सकारात्मक बताया। इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची से डुप्लीकेट और फर्जी नाम हटाए गए और नए योग्य मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया।
इसके अलावा, प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1,200 मतदाताओं की सीमा तय करने के निर्णय को भी राजनीतिक दलों ने एक सराहनीय पहल बताया। उनका मानना है कि इससे मतदान केंद्रों पर भीड़भाड़ कम होगी और मतदाताओं को अधिक सुविधाजनक माहौल मिलेगा।
छठ पर्व के बाद चुनाव कराने की मांग
बिहार के विशेष सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में राजनीतिक दलों ने आयोग से यह आग्रह किया कि चुनावी कार्यक्रम छठ पर्व के बाद आयोजित किया जाए। छठ पर्व बिहार के लिए आस्था और संस्कृति का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है, जिसमें लाखों लोग भाग लेते हैं। ऐसे में त्यौहार के पहले चुनाव कराने से लोगों की भागीदारी पर असर पड़ सकता है।
इसके साथ ही, राजनीतिक दलों ने यह भी सुझाव दिया कि चरणों की संख्या कम रखी जाए ताकि चुनाव प्रक्रिया अधिक सरल और सुलभ हो। उनका मानना है कि लंबा खिंचने वाला चुनाव न केवल प्रशासन पर दबाव डालता है बल्कि राजनीतिक अस्थिरता और तनाव भी पैदा करता है।
आयोग पर जताया भरोसा
बैठक में राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग पर पूर्ण विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए लगातार सकारात्मक पहल कर रहा है। पोस्टल बैलट की गिनती, फॉर्म 17C के प्रावधान और पारदर्शिता बढ़ाने वाले हालिया सुधारों को भी सभी दलों ने सराहनीय बताया। दलों ने आश्वासन दिया कि वे भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में आयोग का हरसंभव सहयोग करेंगे।
बिहार में इस साल का विधानसभा चुनाव खास मायने रखता है। एक तरफ राजनीतिक दल चुनावी रणनीतियां बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आयोग की चुनौती है कि वह चुनाव को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए। बिहार में पहले भी चुनावों में हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और मतदाता सूची की गड़बड़ियों जैसे आरोप लगते रहे हैं। इसलिए आयोग इस बार किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करना चाहता।
