पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा एक्शन, महंगाई और अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए उठाए कई अहम कदम

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पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहे असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, उद्योगों को आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना, व्यापार को गति देना और महंगाई को नियंत्रित रखना है। बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता के अनुसार आर्थिक नीतियों में संतुलित बदलाव कर रही है।

उद्योगों को राहत देने के लिए सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल कच्चे माल पर अस्थायी सीमा शुल्क में छूट देने का फैसला किया है। इससे विनिर्माण क्षेत्र की लागत कम करने और उत्पादन गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही निर्यात और आयात से जुड़े कारोबार को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल राहत योजना भी लागू की गई है। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बिना रुकावट जारी रखना और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों को कम करना है।

सरकार ने निर्यातकों को भी बड़ी राहत दी है। बढ़े हुए मालभाड़े, बीमा प्रीमियम और युद्ध जोखिम से बढ़ी लागत को कम करने के लिए आरओडीटीईपी योजना के लाभ दोबारा बहाल किए गए हैं। इसके अलावा इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 के तहत कारोबारियों और उद्योगों को अतिरिक्त तरलता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे व्यवसायों को वित्तीय दबाव से राहत मिल सके और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

व्यापार को अधिक सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार मुक्त व्यापार समझौतों और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौतों का दायरा भी बढ़ा रही है। इससे भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने के साथ-साथ आयात और निर्यात दोनों क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा होने की उम्मीद है।

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके तहत कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाई जा रही है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो। साथ ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार, घरेलू उत्पादन बढ़ाने, वैकल्पिक ईंधनों को प्रोत्साहित करने और कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण जैसी योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक संतुलित और टिकाऊ बन सके।

कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उर्वरकों और अन्य आवश्यक कृषि इनपुट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। गैस आपूर्ति को मजबूत करने, आयात के स्रोत बढ़ाने, अग्रिम खरीद और बफर स्टॉक तैयार रखने जैसी रणनीतियों पर काम किया जा रहा है ताकि किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।

सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ा। हालांकि बाद में वैश्विक परिस्थितियों में सुधार के साथ कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई, जिससे देश के चालू खाते पर दबाव कम होने और आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए हालिया कदम भी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने और विदेशी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में सहायक होंगे।

सरकार का विश्वास है कि इन सभी नीतिगत उपायों का संयुक्त प्रभाव देश की व्यापक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेगा। महंगाई को नियंत्रित रखने, उद्योगों को गति देने, निवेश का माहौल बेहतर बनाने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रभाव को सीमित करने में ये कदम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर पेट्रोल-डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और कुछ आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क में संतुलित बदलाव जैसे विकल्प भी खुले रखे गए हैं, ताकि बदलती वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम रहे।

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