बिहार में आने वाले विधानसभा चुनावों की चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम कर रही हैं

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस दोनों ही अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रही हैं। यहाँ नवीनतम जानकारी दी गई है
:बीजेपी की रणनीति
- अमित शाह का सक्रिय होना: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव की कमान संभाल ली है और अपनी चुनावी रणनीति को सक्रिय कर दिया है। वह सितंबर 2025 में दो बार बिहार का दौरा कर चुके हैं।
- संगठन को मजबूत करना: भाजपा कमजोर क्षेत्रों में पार्टी की मौजूदगी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें शाहबाद और मगध क्षेत्र भी शामिल हैं।
- पार्टी कार्यकर्ताओं से बैठक: शाह ने कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया जानने, टिकट वितरण को अंतिम रूप देने और चुनावी योजनाओं को तैयार करने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें की हैं।
- घर-घर संपर्क अभियान: पार्टी बूथ स्तर पर घर-घर संपर्क अभियान चला रही है, जिसमें कार्यकर्ताओं को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जनता को सूचित करने के लिए कहा गया है।
- सहयोगियों के साथ बैठकें: भाजपा ने अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में संयुक्त बैठकें करने की योजना बनाई है।
- नए प्रदेश अध्यक्ष की संभावना: सूत्रों के अनुसार, बिहार चुनाव की घोषणा से पहले भाजपा को एक नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है।
कांग्रेस की रणनीति
- सीट-बंटवारे को लेकर दबाव: कांग्रेस महागठबंधन में सीटों के सम्मानजनक बँटवारे के लिए राजद पर दबाव बना रही है। इसके लिए, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली से बिहार भेजा जा रहा है।
- गठबंधन के भीतर तनाव: भाकपा (माले) जैसे सहयोगी दल सीट-बंटवारे को लेकर कांग्रेस के अधिक व्यावहारिक रुख अपनाने की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि 2020 के चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा था।
- यात्राओं पर जोर: राहुल गांधी ने हाल ही में राज्यव्यापी ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ का नेतृत्व किया है।
- प्रदेश चुनाव समिति का गठन: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिहार चुनाव की तैयारी के लिए एक 39 सदस्यीय प्रदेश चुनाव समिति को मंजूरी दी है।
चुनावी माहौल और चुनौतियाँ
- जातीय समीकरण: 2023 की जाति गणना के बाद से बिहार में जातीय समीकरण महत्वपूर्ण हो गए हैं, और यह चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
- मुख्यमंत्री का चेहरा: महागठबंधन में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी मतभेद हैं। जहाँ तेजस्वी यादव ने कहा है कि गठबंधन बिना सीएम चेहरे के चुनाव नहीं लड़ेगा, वहीं कुछ सहयोगियों का मानना है कि यह फैसला चुनाव के बाद लिया जाना चाहिए।
