पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में ‘दीदी की रसोई’ का शुभारंभ

पूर्वी चंपारण जिले के पुलिस प्रशिक्षण केंद्र, मोतिहारी पुलिस लाइन में प्रशिक्षणरत जवानों को स्वच्छ, पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘दीदी की रसोई’ का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस पहल का संचालन जीविका की उन्नति संकुल स्तरीय संघ के माध्यम से किया जा रहा है।
इस रसोई का उद्घाटन जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल एवं पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात ने संयुक्त रूप से फीता काटकर और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक गणेश पासवान, पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के सैकड़ों जवान, जीविका दीदियाँ, और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
दीदी की रसोई का उद्देश्य सिर्फ प्रशिक्षणरत पुलिसकर्मियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि यह ग्राम्य महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक सशक्त कदम है। इस रसोई में 50 से अधिक जीविका दीदियाँ कार्य कर रही हैं, जो प्रतिदिन नाश्ता, दोपहर का भोजन और चाय निर्धारित मेनू के अनुसार तैयार कर जवानों को परोस रही हैं।
रसोई में काम करने वाली महिलाएं एप्रन, साफ यूनिफॉर्म और टोपी का नियमित उपयोग करती हैं, जिससे साफ-सफाई और अनुशासन का भी पालन सुनिश्चित होता है।
यह पहल जहां पुलिस जवानों को पोषणयुक्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन दे रही है, वहीं महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार का स्थायी साधन भी उपलब्ध करा रही है।
“आज मोतिहारी पुलिस लाइन में ‘दीदी की रसोई’ की शुरुआत की गई है। इसमें 50 से अधिक जीविका दीदियाँ काम करेंगी। इससे एक ओर उन्हें रोजगार मिलेगा और दूसरी ओर हमारे पुलिसकर्मियों को शुद्ध, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन मिलेगा। यह पहल स्वावलंबन और गुणवत्ता का बेहतरीन उदाहरण है।”
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात का बयान: “आज से हमारी पुलिस लाइन में दीदी की रसोई का शुभारंभ हुआ है। इस रसोई के माध्यम से करीब 600 पुलिसकर्मियों को हर दिन पौष्टिक आहार मिलेगा, जिससे उनकी ट्रेनिंग भी बेहतर होगी। हम लोग यह प्रयास कर रहे हैं कि थाना स्तर पर भी दीदी की रसोई शुरू की जाए। यह माननीय मुख्यमंत्री जी की उस सोच को साकार करता है, जिसमें वे चाहते हैं कि हर सरकारी कार्यालय में जीविका दीदियों को अवसर दिया जाए।”
“हम सभी दीदी बहुत खुश हैं कि हमें यहां रोजगार का अवसर मिला। हम 50 दीदियाँ मिलकर पुलिस भाइयों के लिए शुद्ध शाकाहारी भोजन बना रहे हैं। इससे हमें आत्मनिर्भर बनने का मौका मिल रहा है। इसके लिए हम मुख्यमंत्री जी को दिल से धन्यवाद देती हैं।”
पूर्वी चंपारण की ‘दीदी की रसोई’ न केवल प्रशिक्षणरत पुलिसकर्मियों के लिए पौष्टिक आहार का माध्यम बनी है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक प्रेरक उदाहरण भी बनकर उभरी है। यह पहल महिला सशक्तिकरण और शासन की सहभागिता आधारित नीति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
