शीतकालीन सत्र से बिहार विधानसभा में शुरू होगा 1 दिसंबर से पहली बार पेपरलेस कार्यवाही

बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है और इस बार सदन एक नए डिजिटल युग में प्रवेश करने जा रहा है। एनडीए की प्रचंड जीत के बाद जहां नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री बने हैं, वहीं तेजस्वी यादव विपक्ष की कमान संभालेंगे। नई सरकार और नए विपक्ष के बीच यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
पूरी कार्यवाही पहली बार पूरी तरह डिजिटल
इस सत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि विधानसभा की पूरी कार्यवाही पहली बार डिजिटल माध्यम से संचालित होगी। सभी विधायकों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं, जिनका उपयोग सवाल पूछने, कार्यसूची देखने और नोट्स तैयार करने के लिए किया जाएगा।
इस कदम को विधानसभा को पेपरलेस, पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहला दिन: शपथ ग्रहण
1 दिसंबर को सत्र के पहले दिन सभी नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी।
प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव, जो आठ बार के विधायक हैं, शपथ प्रक्रिया की अगुवाई करेंगे।
2 दिसंबर: विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव
अगले दिन यानी 2 दिसंबर को स्पीकर का चुनाव होगा।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार इस पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। स्पीकर का चुनाव आने वाले राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।
3 दिसंबर: राज्यपाल का अभिभाषण
3 दिसंबर को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राज्यपाल राज्य सरकार की प्राथमिकताएँ और अगले पांच वर्षों का विकास खाका प्रस्तुत करेंगे।
इसमें ‘डिजिटल विधानसभा’, प्रशासनिक सुधार, कानून-व्यवस्था और बजट अनुमान जैसे मुद्दों के शामिल होने की संभावना है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
हाल ही में आए चुनाव परिणामों में एनडीए ने 202 सीटें जीतकर तीन-चौथाई बहुमत प्राप्त किया है। भाजपा को 89 और जदयू को 85 सीटें मिलीं। वहीं महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया।
सभी 243 सदस्यों के शपथ ग्रहण के साथ विधानसभा की नई कार्यशैली की शुरुआत हो रही है।
